गणित-विज्ञान में कमजोर नहीं हैं लड़कियां : एनसीईआरटी के स्टडी में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की रिपोर्ट चौंकाने वाली - एनसीईआरटी का सर्वे
इलाहाबाद : कौन कहता है कि छात्रएं गणित और विज्ञान में छात्रों से पीछे हैं? अगर कोई यह कहता है तो उसे नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) की सर्वे रिपोर्ट बताइए। यह सर्वे रिपोर्ट कहती है कि आधी आबादी में भी गणित, विज्ञान की अच्छी समझ विकसित हो रही है अब।
राष्ट्रीय स्तर पर 2.7 लाख छात्र छात्रओं के बीच यह सर्वे कराया गया था। इसमें देशभर की छात्रओं की शैक्षिक रिपोर्टऔर उनके प्रदर्शन के आधार पर उनकी लैंग्वेज स्किल छात्रों से बेहतर पाई गई है। एनसीईआरटी ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विभिन्न बोर्ड से ताल्लुकात रखने वाले कुल 7,216 स्कूलों को सर्वे में शामिल किया था। पिछले साल यानि 2015 में कराए गए इस सर्वेक्षण में यह तथ्य सामने आया है कि गणित और साइंस में छात्रएं छात्रों से मुकाबिल हैं। इतना ही नहीं, इंग्लिश के साथ अन्य भाषाओं में भी उनका प्रदर्शन छात्रों से बेहतर है। हालांकि गणित -विज्ञान में उनका ओवर ऑल प्रदर्शन निराशाजनक दिखता है। अधिकतर राज्यों में छात्रओं को इन विषयों में कमजोर दिखाया गया है। कुल 24 राज्यों में विज्ञान विषय में छात्रओं का स्कोर राष्ट्रीय औसत से भी नीचे हैं। गणित में 21 राज्यों में औसत कम है।
सरकारी स्कूल फिसड्डी : एनसीईआरटी के स्टडी में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र छात्रओं की परफॉरमेंस बेहद खराब बताई गई है। इसकी वजह कांसेप्ट का क्लियर न होना है।
सर्वे के खास तथ्य : इंग्लिश में औसतन 41 फीसद सवालों का छात्रओं ने सही जवाब दिया। गणित में यह आंकड़ा 40 फीसद रहा और विज्ञान में 43 फीसद और सामाजिक विज्ञान में 47 फीसद। मार्डन इंडियन लैंग्वेज में छात्रओं का बेहतर परफॉरमेंस रहा। औसतन 53.5 फीसद सवालों का छात्रओं ने सही जवाब दिया।