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संतकबीर नगर : विद्यालयों में नहीं बढ़ी बच्चों की संख्या, अभियान पर ग्रहण

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संतकबीर नगर : विद्यालयों में नहीं बढ़ी बच्चों की संख्या, अभियान पर ग्रहण

संतकबीर नगर : परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की अभी अपेक्षित उपस्थिति नहीं हो रही है। पूर्व की कक्षाओं में अध्ययनरत बच्चों अनेकों को नई कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित नहीं हो सका है। इसके साथ ही नये बच्चों के प्रवेश की रफ्तार मंद है। डेढ़ माह बाद भी संख्या न बढ़ने से जहां सर्व शिक्षा अभियान शत प्रतिशत सफल होने पर ग्रहण लगता दिख रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिला शिक्षा परियोजना समिति की बैठक में दिशा निर्देश दिए गए थे।

सब पढ़े सब बढ़े का ध्येय लेकर सत्र 2016-17 में परिषदीय विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश पर कराने का आह्वान किया गया। पूर्व में अध्ययनरत बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए नये बच्चों प्रवेश पर जोर दिया गया। अथक प्रयास के बाद भी विद्यालयों पर बच्चों की संख्या नहीं बढ़ी। 1व्यवस्था बेदम, बच्चों में आकर्षण कम: कक्षा पांच व आठ उत्तीर्ण करने वाले बच्चों की संख्या घटने के साथ पिछली कक्षाओं में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों का नामांकन नहीं हो सका। कक्षा एक से शिक्षा शुरू होने पर गिने चुने खासकर के विद्यालय के अभाव में नामांकन करा रहें है। अधिकांश बच्चों का नर्सरी में कान्वेंट स्कूल में प्रवेश हो रहा है।

निश्शुल्क शिक्षा, एमडीएम जैसी महत्वाकांक्षी योजना चलाने के बाद भी अभिभावक प्रवेश दिलाने से कतरा रहें हैं। हालांकि कुछ विद्यालयों में छोटे बच्चों को अलग से कक्षा संचालित की जा रही है। अंग्रेजी ज्ञान के साथ औरों से बेहतर शिक्षा देने का शिक्षक-शिक्षिकाएं दावे किए हुए हैं, किंतु यह स्थिति कुछ ही स्थानों पर दिख रही है। कई बच्चे जमीन पर बैठने के कारण विद्यालय में प्रवेश नहीं कराना चाहते हैं।

बच्चों का बस्ता खाली : प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में नई पुस्तकों के वितरण में देरी को देखते हुए पुरानी पुस्तकें देने का फरमान है। बच्चों से पुरानी पुस्तकें न मिल पाने व फटी किताब मिलने पर अधिकांश बच्चों का बैग खाली है। समस्या को देखते हुए कई विद्यालयों में मौखिक व लिखित ज्ञान कराकर समय काटा जा रहा है। इक्का -दुक्का किताब से पढ़ाई होने से बच्चें पूर्वाभ्यास नहीं कर पा रहें हैं।बच्चे जहां किताब न मिलने से परेशान हैं वहीं अव्यस्था से अभिभावकों में रोष है। अभिभावकों का कहना है कि ग्रीरूमावकाश से पुस्तकें मिलती तो बच्चे घर पर पढ़ते।

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