प्राइमरी स्कूलों की पढ़ाई में क्षेत्रीय भाषाओं को भी मिलेगा स्थान
प्राइमरी स्कूलों की पढ़ाई में क्षेत्रीय भाषाओं भोजपुरी, बुंदेलखंडी, अवधी व ब्रज भाषा/बोलियों को भी स्थान मिलेगा। कक्षा एक व दो में पढ़ने वाले बच्चों के लिए उनकी भाषा में आसपास के परिवेश को समझाने के लिए प्रवेशिका (प्राइमर) तैयार की जा रही है ताकि उनकी पढ़ाई में रुचि बढ़े और विषय को बेहतर समझ सकें।
भोजपुरी, बुंदेलखंडी, अवधी व ब्रज भाषाओं में प्रवेशिका विकास के लिए राज्य शिक्षा संस्थान एलनगंज में सोमवार को पांच दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ। यह पहली बार है कि क्षेत्रीय भाषाओं में अध्यापन सामग्री तैयार की जा रही है। 30 से 40 पेज की सचित्र पुस्तक बच्चों को स्थानीय भाषा से मानक भाषा की ओर ले जाने में मददगार होगी।
प्राइमर तैयार होने के बाद इसे स्कूलों में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा और सब कुछ ठीक रहा तो एक अप्रैल 2017 से शुरू होने वाले सत्र से इसके माध्यम से पढ़ाई होगी। जिस जिले में बुंदेलखंड, भोजपुरी, ब्रज व अवधी भाषा बोली जाती है वहां उस भाषा से बच्चों की पढ़ाई कराई जाएगी।
कार्यशाला के उद्घाटन पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शर्मा ने कहा कि प्राइमर के माध्यम पढ़ाने पर शिक्षकों व बच्चों का अपनी स्थानीय भाषा के प्रति रुझान बढ़ेगा। कार्यक्रम समन्वयक नीलम मिश्र ने कहा कि अपनी भाषा में अभिव्यक्ति हहमेशा सहज व सरल होती है।
प्राइमर के माध्यम से बच्चों की लिखित व मौखिक अभिव्यक्ति क्षमता का कुशलतापूर्वक संवर्द्धन किया जा सकेगा। झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा, हाथरस, सुल्तानपुर, फैजाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया के शिक्षकों की सहायता से प्राइमर तैयार किया जा रहा है।
इनका कहना है
निदेशक राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह के मार्गदर्शन में प्रदेश में प्रचलित भाषाओं में पहली बार शिक्षण सामग्री का विकास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों को अपनी स्थानीय भाषा के माध्यम से मानक भाषा से जोड़ना है।
दिब्यकान्त शुक्ल, प्राचार्य राज्य शिक्षा संस्थान