कानपुर : नौ स्कूलों में 23 फीसदी बच्चे मिले, छह का वेतन रोका, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग के अफसर भी सक्रिय हुए
कानपुर वरिष्ठ संवाददाता । सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग के अफसर भी सक्रिय हुए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बिल्हौर और ककवन ब्लॉक के नौ विद्यालयों का निरीक्षण किया। बिना सूचना के गैरहाजिर छह शिक्षक-शिक्षिकाओं का वेतन रोक दिया गया। खासबात यह रही कि कुल 609 पंजीकृत बच्चों में केवल 142 (23.32 प्रतिशत) बच्चे ही हाजिर मिले।
बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीश कुमार यादव ने एक के बाद एक विद्यालय में जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान शिक्षकों के हाजिरी रजिस्टर चेक किए गए। बच्चों की उपस्थिति भी देखी गई। कैंपस के अन्दर सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली। इन स्कूलों में हालात बेहद खराब मिले। ऐसे में किसी को चेतावनी दी गई तो किसी का वेतन रोकने के आदेश हुए।
जब चाहा तब स्कूल आईं : प्राथमिक विद्यालय नयापुरवा में 68 के स्थान पर केवल 39 बच्चे मौजूद थे। यहां एक शिक्षिका अर्चना गैर हाजिर थीं और बीईओ को इसकी सूचना नहीं दी गई थी। उनका एक दिन का वेतन रोका गया। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय, लोधनपुरवा में शिक्षिका निहारिका बिना सूचना के दो दिवसों में गैर हाजिर पाई गईं। यहां 54 के स्थान पर केवल 12 बच्चे मिले। उनका पूरे माह का वेतन रोकने के आदेश किए। प्राथमिक विद्यालय, जोगिन डेरा में निहाल गैर हाजिर मिले। यहां 110 में केवल 10 बच्चे मिले। इनका भी एक दिन का वेतन रोका गया।
इन स्कूलों का भी बुरा हाल : उच्च प्राथमिक विद्यालय, अनाबा में तीन शिक्षक और तीनों किसी न किसी सरकारी काम से स्कूल के बाहर थे। यहां 57 के स्थान पर सिर्फ 12 बच्चे थे। प्राथमिक विद्यालय, मनाबा में 144 के स्थान पर 33 बच्चे ही मिले। यहां पुराने भवन की नीलामी के निर्देश दिए गए। प्राथमिक विद्यालय गुलराहा में सुश्री गरिमा का वेतन रोका गया। यहां 103 के स्थान पर 15 बच्चे ही उपस्थित थे। उच्च प्राथमिक विद्यालय कुरेह में 73 के स्थान पर 21 बच्चे हाजिर मिले। प्राथमिक विद्यालय कुरेह में बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए अनूप सिंहऔर नरेन्द्र कुमार का वेतन रोक लिया गया
📌 कानपुर : नौ स्कूलों में 23 फीसदी बच्चे मिले, छह का वेतन रोका, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग के अफसर भी सक्रिय हुए
जवाब देंहटाएं👉 http://www.primarykamaster.net/2016/12/23.html