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लखनऊ : फिर भी कम निकले राज्य कर्मचारियों के अरमान, कैशलेस इलाज सहित कुछ मांगें पूरी, लंबी फेहरिस्त है बाकी

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लखनऊ : फिर भी कम निकले राज्य कर्मचारियों के अरमान, कैशलेस इलाज सहित कुछ मांगें पूरी, लंबी फेहरिस्त है बाकी

लखनऊ : राज्य कर्मचारियों की ख्वाहिश तो यही थी कि चुनाव में जाने से पहले प्रदेश सरकार उनकी सारी मांगें पूरी कर दे। एक साल पहले से सरकार के शीर्ष अफसरों ने इसके लिए पहल शुरू भी कर दी थी, लेकिन कसर फिर भी बाकी रह गई। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग कैशलेस इलाज की थी। सरकार ने उसके साथ मकान किराया भत्ता बढ़ाने की भी मांग पूरी कर दी, लेकिन राज्य कर्मचारियों के सरकार से अरमान अभी पूरे नहीं हुए हैं। कर्मचारी जिन्हें अपने लिए जरूरी मानते हैं, ऐसी मांगों की लंबी फेहरिस्त तो अभी बाकी है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारी बताते हैं कि कर्मचारी हितों से सीधे तौर पर जुड़ी कई मांगों पर वार्ता के बाद शासन में सहमति बन चुकी थी, लेकिन प्रक्रिया सुस्त होने से इन पर आदेश जारी नहीं हो पाए। इसमें यात्र भत्ते की मांग सबसे ऊपर थी। फील्ड वर्क के राज्य कर्मचारियों को यात्र भत्ता के तौर पर 50 से 100 रुपये तक दिया जाता है, जबकि उनकी मांग इसे बढ़ाने या वास्तविक खर्च अदा किए जाने की है। कर्मचारियों का कहना है कि ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, संग्रह अमीन, बचत प्रचारक, सिंचाई विभाग के नलकूप चालक, सींच पर्यवेक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया, फाइलेरिया, कुष्ठ चिकित्सा व टीकाकरण के लिए मातृ शिशु कल्याण कर्मचारी व स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सहित पैरामेडिकल स्टाफ के कर्मचारी प्रतिदिन औसतन 100 से 150 किलोमीटर की यात्र प्रतिदिन करते हैं, लेकिन उन्हें खर्च के मुकाबले पूरा पैसा नहीं मिलता।

इसी तरह परिषद की मांग पर पिछले साल मार्च में प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में गठित समिति ने पूर्व में की गई सेवाओं को जोड़कर पेंशन आदि का लाभ प्रदान किए जाने का प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया, लेकिन बात बीच में ही रुक गई। ऐसे ही छठे वेतनमान की विसंगतियों के निराकरण के लिए मुख्य सचिव समिति, कृषि उत्पादन आयुक्त समिति व प्रमुख सचिव वित्त समिति ने प्रस्ताव बनाया, लेकिन वेतन विसंगतियां अब भी बरकरार हैं। राज्य कर्मचारियों को सेवा काल के 300 दिवसों की बजाय 600 दिवसों के नकदीकरण की मांग पर भी सहमति बनी, लेकिन निर्णय नहीं हो सका।

राज्य ब्यूरो ’ लखनऊ : राज्य कर्मचारियों की ख्वाहिश तो यही थी कि चुनाव में जाने से पहले प्रदेश सरकार उनकी सारी मांगें पूरी कर दे। एक साल पहले से सरकार के शीर्ष अफसरों ने इसके लिए पहल शुरू भी कर दी थी, लेकिन कसर फिर भी बाकी रह गई। कर्मचारियों की सबसे बड़ी मांग कैशलेस इलाज की थी। सरकार ने उसके साथ मकान किराया भत्ता बढ़ाने की भी मांग पूरी कर दी, लेकिन राज्य कर्मचारियों के सरकार से अरमान अभी पूरे नहीं हुए हैं। कर्मचारी जिन्हें अपने लिए जरूरी मानते हैं, ऐसी मांगों की लंबी फेहरिस्त तो अभी बाकी है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारी बताते हैं कि कर्मचारी हितों से सीधे तौर पर जुड़ी कई मांगों पर वार्ता के बाद शासन में सहमति बन चुकी थी, लेकिन प्रक्रिया सुस्त होने से इन पर आदेश जारी नहीं हो पाए। इसमें यात्र भत्ते की मांग सबसे ऊपर थी। फील्ड वर्क के राज्य कर्मचारियों को यात्र भत्ता के तौर पर 50 से 100 रुपये तक दिया जाता है, जबकि उनकी मांग इसे बढ़ाने या वास्तविक खर्च अदा किए जाने की है। कर्मचारियों का कहना है कि ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, लेखपाल, संग्रह अमीन, बचत प्रचारक, सिंचाई विभाग के नलकूप चालक, सींच पर्यवेक्षक, स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया, फाइलेरिया, कुष्ठ चिकित्सा व टीकाकरण के लिए मातृ शिशु कल्याण कर्मचारी व स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सहित पैरामेडिकल स्टाफ के कर्मचारी प्रतिदिन औसतन 100 से 150 किलोमीटर की यात्र प्रतिदिन करते हैं, लेकिन उन्हें खर्च के मुकाबले पूरा पैसा नहीं मिलता।

इसी तरह परिषद की मांग पर पिछले साल मार्च में प्रमुख सचिव वित्त की अध्यक्षता में गठित समिति ने पूर्व में की गई सेवाओं को जोड़कर पेंशन आदि का लाभ प्रदान किए जाने का प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया, लेकिन बात बीच में ही रुक गई। ऐसे ही छठे वेतनमान की विसंगतियों के निराकरण के लिए मुख्य सचिव समिति, कृषि उत्पादन आयुक्त समिति व प्रमुख सचिव वित्त समिति ने प्रस्ताव बनाया, लेकिन वेतन विसंगतियां अब भी बरकरार हैं। राज्य कर्मचारियों को सेवा काल के 300 दिवसों की बजाय 600 दिवसों के नकदीकरण की मांग पर भी सहमति बनी, लेकिन निर्णय नहीं हो सका।

आचार संहिता का नहीं अड़ंगा

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री शिवबरन सिंह यादव कहते हैं कि वेतन विसंगति सहित कर्मचारियों की अन्य समस्याएं दूर करने के बीच आचार संहिता का अड़ंगा नहीं है। यादव का कहना है कि सरकार कोई नई घोषणा नहीं कर सकती, लेकिन प्रक्रिया में चली आ रही चीजों को पूरा करने में कोई बाधा नहीं है। परिषद ने चुनाव से पहले कर्मचारियों की समस्याएं दूर करने की मांगें पूरी करने का आग्रह किया है।

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