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लखनऊ : यूपी बोर्ड परीक्षाओं में फर्जी शिक्षक बनेंगे कक्ष निरीक्षक, राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों में योग्य शिक्षकों का टोटा

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लखनऊ : यूपी बोर्ड परीक्षाओं में फर्जी शिक्षक बनेंगे कक्ष निरीक्षक, राजधानी के ज्यादातर निजी स्कूलों में योग्य शिक्षकों का टोटा

👉 नाम नहीं, संख्या के आधार पर लगती है ड्यूटी

👉 नहीं होती सख्ती, इसलिए करते हैं मनमानी

👉 परीक्षा शुरू होने के पहले शुरू होता है खेल

डेली न्यूज़ नेटवर्कलखनऊ। वर्ष 2017 की यूपी बोर्ड हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में इस बार फर्जी शिक्षक ड्यूटी करते नजर आएंगे। ये वही शिक्षक हैं जिन्हें खुद शिक्षा विभाग ने शिक्षक पद के लिए अनर्ह घोषित कर दिया है। लेकिन बोर्ड परीक्षाएं इन्हीं के सहारे निपटाने की तैयारी है। इसकी बड़ी वजह राजधानी के निजी स्कूलों में योग्य शिक्षकों का अभाव होना है। दरअसल, इस बार यूपी बोर्ड परीक्षाएं 16 मार्च से शुरू हो रही हैं। हर साल चार से पांच हजार शिक्षकों की ड्यूटी कक्ष निरीक्षक के रूप में लगाई जाती हैं। ड्यूटी के लिए यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पढ़ाने वाले शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता पहले से ही निर्धारित है। लेकिन ज्यादातर शिक्षक एवं प्रिंसिपल अपने पद के अनुसार शैक्षिक योग्यता नहीं पूरा करते हैं। शिक्षा विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि दिए जाने के लिए की जा रही जांच में इसका खुलासा भी हुआ है। आंकड़ों की मानें तो निजी स्कूलों में 75 प्रतिशत शिक्षक अयोग्य हैं। यह सभी निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते हैं। लेकिन फिर भी हर साल ऐसे शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है।

यूपी बोर्ड परीक्षा में निजी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी नाम से नहीं लगाई जाती है। बल्कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से स्कूलों को संख्या के आधार पर शिक्षक ड्यूटी के लिए भेजने के आदेश दिए जाते हैं। इस समय भी जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के स्तर पर आगामी परीक्षा की तैयारी चल रही हैं। इन परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में 2500 शिक्षक तो एडेड और सरकारी स्कूल से होते हैं। शेष 2500 में निजी स्कूल केशिक्षक शामिल होते हैं। स्कूल संचालक अपनी मर्जी से जिन शिक्षकों की चाहें, उन्हें ड्यूटी पर लगा देते हैं। फिर भले ही वह योग्यता पूरी न करते हों। इस बार तो खुद शिक्षा विभाग ने बड़ी संख्या में निजी विद्यालयों के शिक्षकों को अनर्ह घोषित कर दिया है, ऐसे में परीक्षा में योग्य कक्ष निरीक्षक कहां से आएंगे, यह बड़ा सवाल है।

परीक्षा में यदि निजी विद्यालय के शिक्षक नकल कराते पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करके उन्हें ड्यूटी से हटा दिया जाता है, जिससे उनके हौसले बुलंद रहते हैं और शिक्षा माफियाओं की शह पर ऐसे शिक्षक नकल कराने से गुरेज नहीं करते। माध्यमिक शिक्षा संघ के प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्र का कहना है कि फर्जी शिक्षकों का इस्तेमाल नकल कराने के लिए होता है। इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।बोर्ड परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में पूरा खेल किया जाता है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पिछली बार दावा किया था कि वहीं से कक्ष निरीक्षकों के आईकार्ड जारी किए जाएंगे। लेकिन एन वक्त पर योजना फेल हो गई, लिहाजा आनन-फानन में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई । परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी कक्ष निरीक्षक पकड़े गए थे।

बोर्ड परीक्षा में किसी भी फर्जी शिक्षक को ड्यूटी पर नहीं लगाया जाएगा। अनर्ह शिक्षकों का ब्यौरा जुटाया गया है। जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
- उमेश त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक

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