मैनपुरी : जुलाई से कॉलेजों का सत्र, शिक्षकों का संकट
जागरण संवाददाता, मैनपुरी : शासन ने महाविद्यालयों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। प्रत्येक कॉलेज में अब शिक्षकों की हाजिरी बायोमीट्रिक सिस्टम पर होगी। जिन कॉलेजों में अब तक क्लास नहीं लग रही थी, वहां भी हर दिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए क्लास लगेगी और शिक्षकों को भी समय पर ड्यूटी करनी होगी। जिले के 110 कॉलेजों के सामने शिक्षकों का संकट खड़ा हो गया है। इतनी बड़ी संख्या में पीएचडी डिग्रीधारक शिक्षक कहां से मिलेंगे।
डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से जिले में पांच शासकीय और राजकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं। 105 महाविद्यालय सेल्फ फाइनेंस मान्यता प्राप्त हैं। वित्तविहीन कॉलेजों में अब तक विश्वविद्यालय से शिक्षकों का अनुमोदन कागज पर होता था। कुछ शिक्षक ही कॉलेजों में पढ़ाते थे। जबकि गैर जिलों से अनुमोदन कराने वाले शिक्षक कॉलेजों में आते नहीं थे। हालात ये हैं इन 105 कॉलेजों के लिए पूरे जिले में पीएचडी डिग्रीधारक शिक्षक मिलना मुश्किल है। एक कॉलेज में कम से कम 12 शिक्षकों की आवश्यकता है।
इस बार सितंबर की जगह जुलाई से सत्र की शुरुआत करने की घोषणा शासन ने की है। अब कॉलेजों का हाल देखिए मैनपुरी का चित्रगुप्त महाविद्यालय शासकीय कॉलेज है। कॉलेज में 44 शिक्षकों के पद हैं। इसमें सिर्फ 14 शिक्षक कार्यरत हैं। 30 शिक्षकों का लंबे समय से टोटा है। राजकीय महाविद्यालय में भी चार शिक्षकों की कमी है। शासन अपने कॉलेजों में भी शिक्षकों की कमी पूरी नहीं कर पा रहा है। ऐसे में वित्तविहीन कॉलेजों में पीएचडी डिग्रीधारक शिक्षकों की कमी को आखिर कैसे पूरा किया जा सके।
'शासन को चाहिए कि वह जिस तरह बीएड कॉलेज में एमएड डिग्रीधारक को शिक्षण कार्य हेतु योग्य मानता है, उसकी तरह बीए और बीएससी में एमए और एमएससी डिग्रीधारकों को शिक्षण कार्य हेतु योग्य माने। सरकार को शिक्षकों की योग्यता घटानी होगी। इतनी बड़ी संख्या मे पीएचडी डिग्रीधारक लोग नहीं हैं।'
डॉ. आशुतोष पचौरी, महामंत्री सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन आगरा।