बरेली : गांधी जी, स्वच्छ भारत मिशन में 10 फीसदी का ‘तड़का’ भर
बरेली । महात्मा गांधी की जयंती पर सोमवार को प्रशासन ने जिन 100 गांवों को खुले में शौच मुक्त यानी ओडीएफ घोषित करने की तैयारी की है, उनमें ज्यादातर गांव बसपा और सपा की सरकार के दौरान अंबेडकर और लोहिया गांव रह चुके हैं। जाहिर है कि इन गांवों में काफी विकास कार्य उसी दौरान करा दिया गया था। शत-प्रतिशत शौचालयों के निर्माण के लक्ष्य में जो 10-15 फीसदी की कसर रह गई थी, उसे पूरा कराकर इन्हीं गांवों को स्वच्छ भारत मिशन में शामिल कर लिया गया। सोमवार को इन ग्राम पंचायतों में अफसरों की मौजूदगी में प्रस्ताव पारित किया जाएगा कि उनके यहां कोई भी खुले में शौच नहीं जा रहा है। सबके घरों में शौचालय बने हैं।
गांवों को ओडीएफ घोषित करने के इस खेल की पुष्टि यह आंकड़ा भी करता है कि जिले के सभी गांवों को ओडीएफ करने के लिए जरूरी बजट में से जो धनराशि भी शासन ने जिले को दी है, वह एक प्रतिशत से भी कम है लेकिन इसी धनराशि से करीब सात प्रतिशत गांवों को ओ़डीएफ घोषित किया जा रहा है। बता दें कि प्रत्येक शौचालय के निर्माण पर सरकार चयनित लाभार्थी को 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है। जिले में 1.20 लाख स्वच्छ शौचालय बनाने के लिए पंचायत राज ने विभाग ने 14.40 अरब का बजट शासन से मांगा था। डिमांड के सापेक्ष शासन से मात्र 10 करोड़ का बजट मिला। इसमें पहले क्यारा ब्लाक की 44 ग्राम पंचायतों को 25 सितंबर तक ओडीएफ घोषित करने का लक्ष्य तय किया। जब यह लक्ष्य पूरा होता नजर नहीं आया तो जिले भर में 100 गांव गांधी जयंती पर ओडीएफ करने की तैयारी शुरू हुई। अब तक जिले भर में 15401 शौचालय बनाए गए। इनमें छह हजार हाल ही में बने हैं। यह स्थिति तब है, जब 2018 तक पूरे जनपद को ओडीएफ करना है।
77 गांव पहले हो चुके, सौ गांव आज होंगे ओडीएफ घोषित
स्वच्छ भारत मिशन में 77 गांव ओडीएफ घोषित किये जा चुके हैं। सौ गांव आज ओडीएफ घोषित किए जाएंगे। इसके लिए ग्राम पंचायतें पहले ही प्रस्ताव भेज चुकी हैं। अब अधिकारियों की मौजूदगी में सत्यापन करने के बाद इन गांवों को ओडीएफ घोषित किया जाएगा। ओडीएफ के लिए जिन 132 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया था, उनमें ज्यादा काम नहीं कराना था। 2014 से 2016 तक मात्र 36 गांव ही ओडीएफ हो पाए थे।
पॉश कॉलोनियों वाला गांव डोहरा भी घोषित होगा ओडीएफ
डोहरा नगर निगम की सीमा में शामिल गांव है। यहां कई पॉश कालोनियां हैं। खुले में शौच की कोई खास समस्या यहां पहले भी नहीं थी। फिर भी गिनती के जिन घरों में शौचालय की कमी को पूरा कर प्रशासन ने इसे ओडीएफ घोषित करने का श्रेय लेने जा रहा है। ग्राम पंचायत में अधिकांश पक्के मकान पहले से बने हैं। बसपा शासन में ग्राम पंचायत अंबेडकर गांव योजना में शामिल थी। गांव में सौ बीपीएल और 26 परिवार अंत्योदय कार्डधारक हैं। सीसी मार्ग निर्माण समेत तमाम काम पहले से हो चुके थे। प्रधान पति नवीन कुमार का कहना है कि हाल ही में 50 नए शौचालय बनवाए हैं। 20 शौचालय पहले के बने थे। बाकी अधिकांश घरों में शौचालय पहले से ही बने हैं।
ब्लॉक बिथरी -
ग्राम पंचायत डोहरा -
आबादी - 20 हजार
मकान बने- 12 हजार
(आंकड़े लगभग में)
पॉश कालोनियां - सुपर सिटी, सनराइज, महेंद्र नगर, शिवाजी नगर, मां वैष्णोकुंज, गौंटिया, कुसुमनगर।
मेहनत गांव वालों ने की, श्रेय सरकार लेने जा रही है
औसतन 70 फीसदी आबादी संपन्न है। कपड़ा, सब्जी के व्यापार के अलावा खेती जीविकोपार्जन का साधन है। गरीब परिवारों के लोग ईंट भट्ठों पर मजदूरी करते हैं। जरी जरदोजी का भी काम होता है। अधिकांश पक्के मकान बने हैं। जिस वजह से इन घरों में शौचालय पहले से बने थे। प्रधान जन्नत अली का दावा है कि वह सौ शौचालय बनवा चुके हैं। खुले में शौचमुक्त के लिए गांव वालों ने ज्यादा प्रयास किए। हालांकि पंचायत राज की टिगरिंग टीम की जागरूकता के बाद कुछ लोगों ने अपने शौचालय खुद बनाए। कुल मिलाकर मेहनत गांव वालों की रही। सरकारी सिस्टम श्रेय खुद लेगा।
ब्लाक - भोजीपुरा
ग्राम पंचायत - जटौआ
आबादी - 5500
मकान बने - 1200
कोट--
पंचायत राज विभाग की टिगरिंग टीम ने खुले में शौच मुक्त करने के लिए गांवों में छह महीने से जागरूकता अभियान चलाया। विभाग ने भी शौचालय बनवाए हैं। जिन्होंने खुद बनाए, उनको प्रोत्साहन राशि दी गई। बजट कम था। और डिमांड भेजी गई है। ओडीएफ का मतलब है कोई भी खुले में शौच को न जाए। घर-घर में शौचालय हो। विनय कुमार सिंह, डीपीआरओ