इलाहाबाद : आयोग तैयार कर रहा शिक्षक भर्ती का सिलेबस, राजकीय कालेजों में 9892 एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती का मामला, इम्तिहान की तैयारियां शुरू, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआइ जांच ठंडे बस्ते में
राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : प्रदेश के राजकीय हाईस्कूल व इंटर कालेजों में एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती की तैयारियां तेज हो गई हैं। उप्र लोकसेवा आयोग 16 विषयों का सिलेबस तैयार करा रहा है। यह जल्द ही शासन को भेजा जाएगा और वहां से अनुमोदन मिलने पर परीक्षा कार्यक्रम जारी होगा। 1राजकीय कालेजों में 9892 एलटी ग्रेड शिक्षकों की भर्ती होनी है। शासन ने 26 दिसंबर 2016 से 26 जनवरी 2017 तक ऑनलाइन आवेदन लिया था। इसके लिए करीब 12 लाख से अभ्यर्थियों ने दावेदारी की थी। उस समय शासन ने यह चयन मेरिट के आधार पर कराने का आदेश दिया था। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक की अगुवाई में चयन कमेटी बनाई गई थी। असल में पहले एलटी ग्रेड शिक्षक मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशक चयनित करते रहे हैं। पहली बार राज्य स्तर पर भर्ती शुरू हुई। काउंसिलिंग के पहले ही प्रक्रिया रुक गई। प्रदेश की भाजपा सरकार ने यह भर्ती लिखित परीक्षा से कराने के लिए नियमावली में किया है और इसमें साक्षात्कार भी नहीं होंगे। भर्ती कराने की जिम्मेदारी उप्र लोकसेवा आयोग को दी गई है। इस भर्ती के लिए 9342 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन नियुक्तियां अब तक कुल खाली 9892 पदों पर होंगी। 1शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आयोग को अधियाचन भेज दिया है। आयोग के सचिव जगदीश ने बताया कि शासन के निर्देश पर आयोग परीक्षा के लिए 16 विषयों का सिलेबस तैयार करा रहा है। यह पूरा होते ही शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा और उसके बाद परीक्षा कार्यक्रम जारी होगा। उम्मीद है कि दिसंबर तक परीक्षा कार्यक्रम जारी होगा। परीक्षा नए साल में ही होने की उम्मीद है। 1आवेदकों को लेकर ऊहापोह : एलटी ग्रेड भर्ती के लिए जिन अभ्यर्थियों ने दावेदारी की है वह मेरिट से चयन चाहते थे, उस समय उन तमाम अभ्यर्थियों ने आवेदन नहीं किया, जिनकी मेरिट अच्छी नहीं थी। अब ऐसे अभ्यर्थी भी इसमें शामिल होना चाहते हैं। वहीं, दावेदारी कर चुके कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जो परीक्षा देने के इच्छुक नहीं है। यही नहीं ऑनलाइन आवेदन के अंतिम दिनों में वेबसाइट गड़बड़ होने से भी बड़ी संख्या में युवा दावेदारी नहीं कर पाए। इसलिए अधिकांश अभ्यर्थी नए सिरे से आवेदन मांगे जाने के इच्छुक हैं। इस पर शासन व आयोग ही निर्णय लेगा।राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : उप्र लोक सेवा आयोग से सपा शासन के पांच साल में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में है। करीब ढाई महीने पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोग से हुई भर्तियों में धांधली की बात कहते हुए सीबीआइ जांच कराने का एलान किया था। आयोग में अभी इस जांच के लिए कोई अधिकृत जानकारी नहीं पहुंची है, वहीं पूर्व की भर्तियों से संबंधित अभिलेखों को गोपनीय रखा गया है। अखिलेश सरकार में उप्र लोक सेवा आयोग से एक मार्च 2012 से 31 मार्च 2017 तक हुई सभी भर्तियों में एक विशेष जाति के अभ्यर्थियों को अधिक तवज्जो देने, अफसरों पर मनमानी के गंभीर आरोप लगे थे। प्रतियोगी छात्रों ने भी कई चरणों में इसका भारी विरोध किया था। यहां तक कि विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर इलाहाबाद में पुलिस की लाठियां और गोलियां तक चलीं थीं। इसके मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जुलाई को बजट सत्र में एक बड़ी घोषणा करते हुए आयोग से सपा शासन में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच कराने की बात कही थी। उनका एलान था कि कोई भी दोषी बचने नहीं पाएगा। आयोग में कई दिनों से इस जांच को लेकर हलचल तो है, लेकिन अधिकृत रूप से इसे नकारा जा रहा है। सचिव जगदीश कहते हैं कि सीबीआइ जांच के संबंध में अखबारों में ही पढ़ा है, कोई अधिकृत जानकारी या निर्देश उनके पास नहीं है।