नई दिल्ली : उच्च शिक्षा बजट से ज्यादा विदेशों में जाता है धन
सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने में सफल रही तो इसका असर देश के खजाने पर भी दिखेगा। वजह स्पष्ट है। अगर पिछले साल की ही बात करें तो उच्च शिक्षा के नाम पर 66 हजार करोड़ रुपये विदेश चला गया था, इस साल उच्च शिक्षा का बजट 33 हजार करोड़ रुपये है।
एक के मुताबिक, अकेले अमेरिका में ही उच्च शिक्षा के लिए हर साल जा रहे भारतीय छात्र करीब 44 हजार करोड़ रुपये खर्च करते हैं। दूसरे देशों में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों के खर्च को जोड़ने पर यह राशि करीब 66 हजार करोड़ रुपये हो जाती है। जाहिर है कि देश के अंदर अगर विश्वस्तरीय संस्थान हों तो विदेश की ओर रुख कर रहे छात्रों में कमी आएगी। सरकार को उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए फिलहाल काफी पैसे की जरूरत पड़ेगी। कहती है कि सालाना करीब दो लाख भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए अकेले अमेरिका जाते हैं। विदेश जा रहे भारतीय छात्रों को लेकर यह हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रलय के लिए काम कर रही एक निजी एजेंसी ने दी है। सूत्रों की मानें तो उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। संस्थानों के पास न तो इतने संसाधन हैं और न ही विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों जैसी स्वायत्तता है। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार को लंबा समय लगेगा। फिलहाल इसकी राह उतनी आसान नहीं दिखती है। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने पिछले साल देश के 20 उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की घोषणा की है। इनमें 10 सरकारी और 10 निजी संस्थान होंगे। इसे लेकर मंत्रलय ने काम शुरू कर दिया है। मंत्रलय ने हाल में इसको लेकर आवेदन भी मांगे हैं।’>>वर्ष 2017-18 का उच्च शिक्षा का बजट है करीब 33 हजार करोड़ 1’>>विदेश जाने वाले छात्र ने खर्च किए 66 हजार करोड़ रुपये