नई दिल्ली : सिर्फ डिग्री के भरोसे नहीं बन पाएंगे प्रोफेसर
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनने के लिए चयन का आधार अब अकेले शोध या डिग्रियां ही नहीं होगी, बल्कि इसके लिए प्रशासनिक और नेतृत्व क्षमता की भी परख होगी। मानव संसाधन विकास मंत्रलय जल्द ही विश्वविद्यालय में नियुक्त होने वाली फैकल्टी के चयन में इसे अनिवार्य कर सकती है। फिलहाल मंत्रलय ने हाल ही में देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ चर्चा में यह राय साझा की है। जिसमें कुलपतियों से इस पर अमल करने की भी सलाह दी है। 1मंत्रलय ने विश्वविद्यालयों को यह सलाह उस समय दी है, जब मौजूदा समय में अकेले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सहायक प्रोफेसर के करीब छह हजार पद खाली पड़े है। जिन्हें भरने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। इस बीच, मंत्रलय ने विवि से खाली पदों को जल्द से भरने के निर्देश भी दिए है। माना जा रहा है कि विवि में खाली पड़े इन पदों के चयन में इसे अजमाया भी जा सकता है। 1देश भर के चुनिंदा 75 विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ लीडरशिप डेवलपमेंट इन हायर एजुकेशन विषय पर चर्चा के दौरान मंत्रलय ने सभी से विश्वस्तरीय बनने की दिशा में आगे बढ़ने की पहल की। साथ ही संस्थानों से जरूरी संसाधन जुटाने के निर्देश दिए। मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय ऐसी फैकल्टी के चयन को प्राथमिकता दे, जिनमें शोध और डिग्री के साथ प्रशासनिक और नेतृत्व की क्षमता हो। इनमें उद्योग घराने और सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी भी हो सकते है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस दौरान कुलपतियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस पर बात भी की। इस दौरान कुलपतियों ने मंत्री से सवाल-जबाव भी किया। चर्चा में हार्वर्ड सहित कई विदेशी विश्वविद्यालय में फैकल्टी के चयन में इस तरह के प्रयासों का हवाला भी दिया गया।