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सहारनपुर : नए सत्र से बच्चों को नहीं मिल सकेंगी किताबें? टेंडर में हुई देरी: अंग्रेजी माध्यम की भी छपेंगी, एक अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र

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सहारनपुर : नए सत्र से बच्चों को नहीं मिल सकेंगी किताबें? टेंडर में हुई देरी: अंग्रेजी माध्यम की भी छपेंगी, एक अप्रैल से शुरू होगा नया सत्र


सहारनपुर :परिषदीय स्कूलों के बच्चों को अप्रैल से आरंभ होने नए सत्र से किताबें नही मिल सकेंगी। देरी से टेंडर मांगे जाने के कारण यह स्थिति पैदा होने की संभावना बन रही है। अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए इस बार अलग से किताबें छपवाई जाएंगी। चालू शैक्षिक सत्र में अभी त्कई ब्लाक के स्कूलों में बच्चों को कुछ किताबें नहीं मिल सकी हैं।

बेसिक शिक्षा की दशा और दिशा सुधारने में जुटी प्रदेश सरकार के प्रयास अभी तक फलीभूत नही हो पा रहे है। सत्र 2017-18 में स्कूली बच्चों को जुलाई से किताबें मिलना आरंभ हुई थी। कई चरणों में हुई आपूर्ति के बाद कुछ विषयों की पुस्तकें अभी तक भी नही पहुंच सकी है। शिक्षकों के मुताबिक प्राइमरी कक्षाओं की अपेक्षा जूनियर कक्षाओं में किताबें मांग के सापेक्ष काफी कम पहुंची है। कक्षा-6 में गणित, कक्षा-8 में हिन्दी सहित कई विषय की किताबों के न पहुंचने से शिक्षक जैसे-तैसे पुरानी किताबों से ही अध्यापन करा रहे है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संदीप सिंह पंवार कई बार किताबों की कमी का मुद्दा विभाग के समक्ष उठा चुके हैं। 1नए सत्र में रहेगी कशमकश 1अप्रैल से आरंभ हो रहे नए शैक्षिक सत्र में किताबें मिलने के आसार अच्छे नही है। सूत्र बताते हैं कि लखनऊ स्तर पर नए टेंडर के लिए प्रकाशकों से 26 फरवरी तक आवेदन मांगे गए हैं इसके बाद नियमानुसार चयनित प्रकाशकों को तीन माह का समय किताबों की ¨पट्रिंग के लिए दिया जायेगा। अंग्रेजी माध्यम की किताबें भी इस बार छपवाई जायेंगी। बताते चलें कि जिले में इस बार हर ब्लाक में 5-5 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई आरंभ की जायेगी। जिले में इन स्कूलों की संख्या करीब 60 होगी। एक आंकलन के अनुसार 600 से अधिक बच्चे अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के दायरे में शामिल होंगे।

पुरानी किताबें ही विकल्प

इस बार भी नए सत्र में पुरानी किताबें ही अध्यापन का आधार बनेगी। नई किताबें समय पर न आने के कारण ये हालात बनने की संभावना है। जिले के परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत बच्चों की संख्या 1.73 लाख से अधिक हैं। शिक्षक बताते है कि वार्षिक परीक्षा के बाद पूर्व की भांति इस बार भी बच्चों से पुरानी किताबें एकत्र की जायेंगी ताकि नए सत्र में किताबें मिलने तक उनसे अध्यापन कार्य कराया जा सके।

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