बा' की बेटियों का हौसला बढ़ाएंगी 'सीनियर दीदी'
कस्तूरबा गांधी (बा) आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए नए प्रयोग किए जा रहे हैं। इसके लिए पुरातन छात्र सम्मेलन करने का निर्णय लिया गया है। ताकि बा की बेटियां यह समझ सकें कि अभाव के बाद उनकी ही जैसी लड़कियों ने मुकाम हासिल किया है।...
गोरखपुर : कस्तूरबा गांधी (बा) आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए समय-समय पर कई योजनाएं चलाई जाती हैं। ऐसे ही आयोजनों में शामिल हैं पुरातन छात्रा सम्मेलन। इन सम्मेलनों में उन छात्राओं को बुलाया जाएगा, जो कस्तूरबा से पढ़कर निकली हैं और वर्तमान में बेहतर मुकाम हासिल करने की राह पर अग्रसर हैं। 'बा' की बेटियों की ये सीनियर दीदी अपने अनुभवों से उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित करेंगी और उनका हौसला भी बढ़ाएंगी।
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राएं आमतौर पर आर्थिक रूप से कमजोर आयवर्ग वाले घरों से आती हैं। इस विद्यालय में उन्हें पढ़ने-लिखने का एक बेहतर माहौल मिलता है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए खेलकूद से लेकर अन्य कई प्रकार की योजनाएं चलाई जाती हैं। बास्केटबॉल व वालीबॉल जैसे खेलों में यहां की छात्राएं ओपेन प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभाग करती हैं और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती हैं। समय-समय पर उनका प्रशिक्षण भी आयोजित कराया जाता है। इन विद्यालयों में आयोजित होने वाला पुरातन छात्रा सम्मेलन भी इसी का एक हिस्सा हैं। इस सम्मेलन में अब ऐसी छात्राओं को बुलाया जाएगा, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने हौसले के बल पर यहां से पास होकर निकलीं और पढ़ना नहीं छोड़ा। गोरखपुर जनपद में स्थित 20 कस्तूरबा विद्यालयों में ऐसे कई उदाहरण मिल जाते हैं। कई छात्राएं आज उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी मिशाल भी दी जाती है।
अपने जैसी छात्राओं से प्रेरित होती हैं लड़कियां
पास आउट हो चुकीं छात्राओं से उनका अनुभव साझा कराने के पीछे विभाग का स्पष्ट तर्क है। जिला समन्वयक सर्व शिक्षा अभियान विवेक जायसवाल कहते हैं कि जब छात्राओं को पता चलता है कि अनुभव सुनाने वाली सीनियर छात्रा उन्हीं जैसे परिवेश से निकलकर आई है तो उनमें एक तरह का आत्मविश्वास पैदा होता है कि वे भी ऐसा कर सकती हैं। ये कार्यक्रम काफी कारगर साबित होता है।