एक छत के नीचे 'प्राइमरी का मास्टर' से जुड़ी शिक्षा विभाग
की समस्त सूचनाएं एक साथ

"BSN" प्राइमरी का मास्टर । Primary Ka Master. Blogger द्वारा संचालित.

जनपदवार खबरें पढ़ें

जनपदवार खबरें लखनऊ महराजगंज इलाहाबाद प्रयागराज गोरखपुर उत्तर प्रदेश सिद्धार्थनगर फतेहपुर गोण्डा कुशीनगर बदायूं सीतापुर बलरामपुर संतकबीरनगर देवरिया बस्ती रायबरेली बाराबंकी फर्रुखाबाद वाराणसी हरदोई उन्नाव सुल्तानपुर पीलीभीत अमेठी अम्बेडकरनगर सोनभद्र बलिया हाथरस श्रावस्ती सहारनपुर बहराइच मुरादाबाद कानपुर जौनपुर अमरोहा लखीमपुर खीरी मथुरा फिरोजाबाद रामपुर गाजीपुर बिजनौर शाहजहांपुर बागपत बांदा प्रतापगढ़ मिर्जापुर जालौन चित्रकूट कासगंज ललितपुर मुजफ्फरनगर अयोध्या चंदौली गाजियाबाद हमीरपुर महोबा झांसी अलीगढ़ गौतमबुद्धनगर संभल हापुड़ पडरौना बुलंदशहर देवीपाटन फरीदाबाद

Search Your City

गोरखपुर : विद्यालयों की बेकार पड़ी भूमि पर अब होगी खेती, परिषदीय विद्यालयों की कृषि योग्य भूमि की शुरू हुई तलाश

0 comments

विद्यालयों की बेकार पड़ी भूमि पर अब होगी खेती, परिषदीय विद्यालयों की कृषि योग्य भूमि की शुरू हुई तलाश


500 से अधिक विद्यालयों में है खेती योग्य भूमि1 ग्रामीण क्षेत्र के सभी विकास खंडों के अधिकतर विद्यालयों में भूमि खाली हैं। खेती करने लायक भूमि 500 से अधिक विद्यालयों में मिली है। चिन्हित भूमि की सूचना जिलाधिकारी को दे दी गई है। राजस्व टीम अब यह पता लगाएगी कि कुल कितनी भूमि विद्यालयों के पास है, उसके बाद कृषि की योजना बनाई जाएगी।

परिषदीय विद्यालयों की कृषि योग्य भूमि की शुरू हुई तलाश

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों की खराब दशा किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय भवन के रंग-रोगन, मरम्मत आदि के नाम पर अत्यंत कम बजट दिया जाता है। इसके कारण जर्जर भवन ठीक नहीं हो पाते। पर, अब इस समस्या से निजात पाने का रास्ता ढूंढ़ लिया गया है। परिषदीय विद्यालयों की खाली पड़ी भूमि पर अब खेती कराई जाएगी। खेती से प्राप्त आय का उपयोग विद्यालयों के सुंदरीकरण व अन्य सुविधाएं बढ़ाने पर किया जाएगा।

अपर मुख्य सचिव बेसिक ने सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अपने जिले के उन विद्यालयों की तलाश करें, जहां कृषि योग्य भूमि है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि खाली भूमि पर खेती कराई जाए और उससे आय प्राप्त कर विद्यालयों में खर्च किया जाए, जिससे विद्यालय सुंदर दिखें और जरूरी सुविधाएं वहां मिल सकें। वर्तमान में विद्यालयों की मरम्मत के नाम पर प्राइमरी स्कूल में पांच हजार रुपये व उच्च प्राथमिक में सात हजार रुपये सालाना का बजट दिया जाता है। यह बजट मरम्मत के लिए पर्याप्त नहीं होता।शासन ने परिषदीय विद्यालयों में कृषि योग्य भूमि का ब्योरा मांगा है। ब्योरा उपलब्ध करा दिया गया है। आगे जैसा निर्देश होगा, पालन किया जाएगा।

भूपेंद्र नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

महत्वपूर्ण सूचना...


बेसिक शिक्षा परिषद के शासनादेश, सूचनाएँ, आदेश निर्देश तथा सभी समाचार एक साथ एक जगह...
सादर नमस्कार साथियों, सभी पाठकगण ध्यान दें इस ब्लॉग साईट पर मौजूद समस्त सामग्री Google Search, सोशल नेटवर्किंग साइट्स (व्हा्ट्सऐप, टेलीग्राम एवं फेसबुक) से भी लिया गया है। किसी भी खबर की पुष्टि के लिए आप स्वयं अपने मत का उपयोग करते हुए खबर की पुष्टि करें, उसकी पुरी जिम्मेदारी आपकी होगी। इस ब्लाग पर सम्बन्धित सामग्री की किसी भी ख़बर एवं जानकारी के तथ्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी एवं समस्या पाए जाने पर ब्लाग एडमिन /लेखक कहीं से भी दोषी अथवा जिम्मेदार नहीं होंगे, सादर धन्यवाद।