विद्यालयों की बेकार पड़ी भूमि पर अब होगी खेती, परिषदीय विद्यालयों की कृषि योग्य भूमि की शुरू हुई तलाश
500 से अधिक विद्यालयों में है खेती योग्य भूमि1 ग्रामीण क्षेत्र के सभी विकास खंडों के अधिकतर विद्यालयों में भूमि खाली हैं। खेती करने लायक भूमि 500 से अधिक विद्यालयों में मिली है। चिन्हित भूमि की सूचना जिलाधिकारी को दे दी गई है। राजस्व टीम अब यह पता लगाएगी कि कुल कितनी भूमि विद्यालयों के पास है, उसके बाद कृषि की योजना बनाई जाएगी।
परिषदीय विद्यालयों की कृषि योग्य भूमि की शुरू हुई तलाश
जागरण संवाददाता, गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों की खराब दशा किसी से छिपी नहीं है। विद्यालय भवन के रंग-रोगन, मरम्मत आदि के नाम पर अत्यंत कम बजट दिया जाता है। इसके कारण जर्जर भवन ठीक नहीं हो पाते। पर, अब इस समस्या से निजात पाने का रास्ता ढूंढ़ लिया गया है। परिषदीय विद्यालयों की खाली पड़ी भूमि पर अब खेती कराई जाएगी। खेती से प्राप्त आय का उपयोग विद्यालयों के सुंदरीकरण व अन्य सुविधाएं बढ़ाने पर किया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव बेसिक ने सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे अपने जिले के उन विद्यालयों की तलाश करें, जहां कृषि योग्य भूमि है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि खाली भूमि पर खेती कराई जाए और उससे आय प्राप्त कर विद्यालयों में खर्च किया जाए, जिससे विद्यालय सुंदर दिखें और जरूरी सुविधाएं वहां मिल सकें। वर्तमान में विद्यालयों की मरम्मत के नाम पर प्राइमरी स्कूल में पांच हजार रुपये व उच्च प्राथमिक में सात हजार रुपये सालाना का बजट दिया जाता है। यह बजट मरम्मत के लिए पर्याप्त नहीं होता।शासन ने परिषदीय विद्यालयों में कृषि योग्य भूमि का ब्योरा मांगा है। ब्योरा उपलब्ध करा दिया गया है। आगे जैसा निर्देश होगा, पालन किया जाएगा।
भूपेंद्र नारायण सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी