इलाहाबाद : बोर्ड एक, शिक्षक भर्ती दो अर्हता तय करते हैं तीन, चयन बोर्ड के निर्णय पर सवाल
इलाहाबाद : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र ने जुलाई को आठ विषयों के पद निरस्त किए हैं। उनमें से दो विषयों जीव विज्ञान व संगीत की लिखित परीक्षा उप्र लोकसेवा आयोग लेने जा रहा है। एक ही यूपी बोर्ड के राजकीय व अशासकीय कालेजों के शिक्षक चयन में यह नौबत इसलिए आई है, क्योंकि उनकी अर्हता एक नहीं हैं, बल्कि तीन संस्थाएं उसे तय करती हैं। इतना ही नहीं माध्यमिक शिक्षा के अफसर 1998 के शासनादेश की परवाह न करके विषय निरस्त मामले में खेमों में बंट गए हैं। 1प्रदेश में यूपी बोर्ड से संचालित राजकीय माध्यमिक कालेज व अशासकीय कालेज हैं। चयन बोर्ड अशासकीय कालेजों के लिए शिक्षकों का चयन करता है तो शिक्षा निदेशालय राजकीय कालेजों के लिए चयन करवाता है। यूपी बोर्ड ही माध्यमिक कालेजों की अर्हता लंबे समय से तय करता आ रहा है। इधर राजकीय कालेजों में नियुक्तियों के लिए अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कुछ विषयों में यूपी बोर्ड से इतर अर्हता तय की है। इससे एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के आवेदन के समय अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। कई विषयों के अभ्यर्थी हाईकोर्ट तक पहुंचे और वहां से निर्देश लेकर आवेदन किया। कुछ मामलों में शासन भी अर्हता के संबंध में निर्देश देता रहा है, चयन बोर्ड का कहना है कि वह यूपी बोर्ड की ही अर्हता मान रहा है, शासन कोई निर्देश नहीं देता है। अलग-अलग अर्हता होने से ही विवाद बढ़े हैं, इसे लेकर कुछ अभ्यर्थी हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं कि जब मुख्य संस्था एक है तो शिक्षक चयन के मानक अलग क्यों रखे जा रहे हैं? ।
चयन बोर्ड के निर्णय पर सवाल
चयन बोर्ड ने पिछले दिनों आठ विषयों के 321 पद निरस्त किए हैं, यह निर्णय अब सवालों के घेरे में है। असल में चयन बोर्ड सिर्फ चयन संस्था है उसे अधियाचन जिलों से और अर्हता यूपी बोर्ड की मानना है, तब वह पद निरस्त कैसे कर सकता है। यह कार्य शासन को करना चाहिए, क्योंकि पदों की स्वीकृति शासन करता है। साथ ही इस अहम फैसले से पहले माध्यमिक के अन्य अफसरों को विश्वास में नहीं लिया गया। चयन बोर्ड ने पद निरस्त करने की विज्ञप्ति में यह स्पष्ट नहीं किया है कि जीव विज्ञान आदि विषयों के दावेदार यदि दूसरे विषय में आवेदन कर देंगे, तब 321 पदों का क्या होगा? क्या ये पद खाली रहेंगे? या फिर नए सिरे से आवेदन होंगे? सवाल यह भी है कि जीव विज्ञान विषय खत्म नहीं हुआ है, बल्कि विज्ञान पाठ्यक्रम में समाहित किया गया है, तब विषय का पद खत्म करना कहां तक जायज है? यही नहीं 2016 का एक भी पद खत्म नहीं हुआ है केवल कुछ विषय नहीं हैं, तब उन्हें निरस्त कैसे किया जा सकता है?।जुलाई को आठ विषयों के पद किए हैं निरस्तराजकीय माध्यमिक कालेज संचालितकालेज प्रदेश में हैं अशासकीयके आवेदन के वक्त हुआ प्रदर्शन