दिव्यांग बच्चे देख रहे गुरु जी की राह
45 की जगह महज 34 शिक्षकों की तैनाती...
बस्ती : दिव्यांग बच्चों का भविष्य संवारने में समेकित शिक्षा कारगर नहीं हो पा रही है। सर्वशिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2005 में दिव्यांग बच्चों में निखार लाने की कवायद छिड़ी थी। शुरुआती दौर में जो व्यवस्था बनी उसमें इजाफा नहीं हो पाया। अलबत्ता संसाधनों में और कमी होती गई। प्रत्येक ब्लाक में विशेष शिक्षकों के तीन पद सृजित हुए थे। बेसिक शिक्षा विभाग में अस्थाई तौर पर 45 विशेष शिक्षक और एक जिला समन्वयक नियुक्त किए गए। दिव्यांगों की शिक्षा अभी रफ्तार पकड़ती कि व्यवस्था सुस्त हो चली। स्थाई नौकरियों में आने की वजह से इसमें से नौ शिक्षक चलता बने। बचे 34 शिक्षक। इन्हीं के कंधे पर दिव्यांगों की पूरी शिक्षा व्यवस्था है। सभी विद्यालयों पर नियमित पहुंच पाना इन शिक्षकों के लिए संभव नहीं है। दिव्यांगता प्रभावित बच्चों को पढ़ा पाना सामान्य शिक्षकों की क्षमता में नहीं है। अब यह बच्चे कई-कई दिन विशेष शिक्षक के इंतजार में रहते हैं। महज एक एक्सीलेरेटेड लर्निंग कैंप भी ठीक से संचालित नहीं हो पा रहा है। बजट के अभाव में बस्ती में यह कैंप इस बार केवल आठ माह के लिए संचालित हो रहा है। यह तब है जबकि सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन्हें संवारने में ज्यादा समय और मेहनत की जरूरत होती है। संतकबीरनगर जनपद में यह कैंप बंद हो गया है। परिषदीय स्कूलों में और बुरा हाल है। यह बच्चे निराश लौट रहे हैं। विशेष शिक्षकों को सप्ताह में छह विद्यालयों पर पहुंचना होता है। मानदेय और संसाधनों में कमी की वजह से इनके लिए यह भी संभव नहीं है। अधिकांश विद्यालयों में पंजीकृत दिव्यांग बच्चों की बारी आने में महीनों लग जा रहे हैं। 3225 दिव्यांग बच्चों का हुआ है नामांकन