प्रयागराज : एपीएस भर्ती की जांच से अफसरों में मची खलबली
राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : सीबीआइ ने गुरुवार को पीई तो अपर निजी सचिव भर्ती (एपीएस) में धांधली के मामले में दर्ज की है लेकिन, इसने परेशानी पीसीएस भर्ती 2015 के चयनित अफसरों की बढ़ा दी है। भर्तियों की जांच की रफ्तार सुस्त पड़ने से राहत महसूस कर रहे अधिकारियों पर शिकंजा फिर कसे जाने के आसार बढ़ गए हैं, क्योंकि यूपीपीएससी से सीबीआइ अफसर जांच में आवश्यक रिकॉर्ड लगातार मांग रहे हैं और दिल्ली मुख्यालय व प्रयागराज के गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में भी अभिलेख खंगाले जा रहे हैं।
सपा शासन के पांच साल के कार्यकाल यानी अप्रैल 2012 से मार्च 2017 तक यूपीपीएससी से हुई सभी भर्तियों और परीक्षाओं की सीबीआइ जांच 31 जनवरी 2018 से शुरू हुई थी जो टीम लीडर राजीव रंजन की नवंबर में प्रतिनियुक्ति समाप्त होते ही शिथिल पड़ गई। जांच में तेजी रहने तक सीबीआइ अफसरों ने पीसीएस 2015 के संदिग्ध चयनितों पर शिकंजा कसा था तो यूपीपीएससी के अधिकारी और परीक्षा भवन के कर्मचारी भी आफत में रहे। लेकिन, पिछले नौ माह से सीबीआइ की सक्रियता को शिथिल मानकर उन चयनितों ने राहत की सांस ली थी जो मुख्य टारगेट पर थे। गुरुवार को सीबीआइ की ओर से बसपा शासन की एपीएस भर्ती के मामले में पीई (प्राथमिक रिपोर्ट) दर्ज होते ही इन सभी चयनितों में भी खलबली मच गई है। जबकि मुश्किलें सचिवालय में नियुक्त अपर निजी सचिवों और उनके सरपरस्त अफसरों पर सबसे अधिक हैं। सचिव जगदीश का कहना है कि एपीएस भर्ती के संबंध में रिकॉर्ड सीबीआइ ने अभी नहीं मांगे हैं जबकि पीसीएस 2015 व अन्य बड़ी भर्तियों के अभिलेख लगातार सीबीआइ ले रही है। रिकॉर्ड ऑनलाइन तो मांगे ही जा रहे हैं टीमें स्वयं भी आकर अभिलेख ले रही है। गोविंदपुर स्थित कैंप कार्यालय में भी भर्तियों की जांच में एक दो दिन में तेजी आएगी।
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