एक समय में दो कॉलेजों में पढ़ा छात्र
नगर के क्रिश्चियन इंटर कॉलेज में तीन वर्ष पहले वर्ष 2016 में उत्कर्ष चतुर्वेदी की नियुक्ति प्रवक्ता पद पर प्रबंध समिति द्वारा की गई। अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन डीआइओएस आरपी यादव को भेजी गई। उन्होंने जानकारी जुटाई तो कुछ गड़बड़ लगा। इस पर उन्होंने अनुमोदन नहीं दिया। प्रवक्ता के पद पर तैनात उत्कर्ष चतुर्वेदी के फर्जी अभिलेखों की शिकायत हुई तो डीआईओएस सर्वेश कुमार ने जांच बैठा दी।
सह जिला विद्यालय निरीक्षक शौकीन सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया। विभाग ने इस दौरान शिकायत के अनुसार, सेंट थॉमस और एकरसानंद के रिकार्ड खंगाले तो दोनों स्कूलों में एक ही समय में प्रवक्ता ने कक्षा छह से नौ तक की शिक्षा संस्थागत रहते हुए प्राप्त की, जो संभव नहीं था। प्रवक्ता की नियुक्ति को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
विभागीय जांच में सेंट थॉमस से प्राप्त किए गए रिकार्ड के अनुसार, अप्रैल 2002 में उत्कर्ष चतुर्वेदी का प्रवेश शहर के सेंट थॉमस स्कूल में कक्षा पांच में हुआ और सत्र 2006-07 तक उत्कर्ष चतुर्वेदी ने यहां कक्षा नौ तक शिक्षा प्राप्त की। वहीं एकरसानंद इंटर कॉलेज से विभाग को प्राप्त रिकार्ड के अनुसार, उत्कर्ष चतुर्वेदी ने यहां 15 जुलाई 2002 को कक्षा छह में प्रवेश पाया और 31 मई 2006 को कक्षा नौ पास किया।
प्रवक्ता का पिता था विभाग में स्टेनो: प्रवक्ता का पिता धीरेंद्र नाथ चतुर्वेदी डीआइओएस कार्यालय और बीएसए कार्यालय में वर्षों तक स्टेनों के पद पर कार्यरत रहा है। माना जा रहा है कि उसके द्वारा ही फर्जी तरीके से अधिकारियों को गुमराह कर उत्कर्ष की अलग-अलग कॉलेजों से टीसी जारी कर दी गई।
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रिकॉर्ड से छेड़छाड़
एकरसानंद इंटर कॉलेज में दर्ज उत्कर्ष चतुर्वेदी रिकार्ड में बड़ी छेड़छाड़ की गई है। कक्षा छह से लेकर कक्षा नौ तक के छात्र उपस्थिति रजिस्टर में उत्कर्ष का रिकार्ड अंतिम दो पंक्तियों में दर्ज है। कक्षा छह के उपस्थिति रजिस्टर में कक्षाध्यापक ने कुल छात्र संख्या 34 दर्ज की है। और 34 छात्रों की ही फीस जमा की गई है। जबकि बाद में छेड़ छाड़कर इसमें दो नाम बढ़ाए गए हैं जिनमें एक नाम उत्कर्ष का है। इसी प्रकार कक्षा सात में 38 छात्रों की फीस जमा हुई और दो छात्र अतिरिक्त चढ़ाए गए। कक्षा आठ में भी ऐसा ही हुआ। यहां भी फीस जमा होने से एक छात्र अधिक दर्शाया गया। यहीं नहीं एकरसानंद कॉलेज से उपलब्ध एसआर रजिस्टर में भी छेड़छाड़ की गई। एसआर रजिस्टर के क्रमांक 13203 से लेकर 13301 तक जो प्रवेश हुए वह वर्ष 2003- 04 में हुए। आखिर इतने क्रमांक के बाद एसआर संख्या 13302 में उत्कर्ष का प्रवेश 15 जुलाई 2002 दर्शाया गया। ऐसा कैसे संभव है।
जांच के दौरान यह मामला सामने आया है, जल्द ही कार्रवाई की जाएगी।
- सर्वेश कुमार, डीआइओएस