कानपुर । शिक्षामित्रों को दिए जाने वाले मानदेय से उनके प्रोविडेंट फंड की 2015 से अब तक कटौती नहीं हुई है। ईपीएफओ ने 29 अक्तूबर तक बेसिक शिक्षा अधिकारी का खाता सीज करने की तैयारी कर ली है। इस बीच उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ ने कहा है कि फंड के लिए कटौती न करना शिक्षा विभाग की गलती है। जिस माह से भी कटौती शुरू होगी उससे पहले तक की धनराशि का भार विभाग ही वहन करे।
प्रदेश में कानपुर देहात और महोबा के बेसिक शिक्षा अधिकारियों के खाते पीएफ रिकवरी में सीज किए जा चुके हैं। कानपुर नगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने भी नोटिसों के बावजूद पीएफ का अंशदान जमा नहीं किया है। कानपुर जोन में कानपुर नगर, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर, झांसी, ललितपुर, उन्नाव, कन्नौज, फर्रुखाबाद, महोबा, औरैया, जालौन, चित्रकूट, इटावा, बांदा और उरई के बेसिक शिक्षा अधिकारी आते हैं।
करोड़ों का है बकाया : ईपीएफओ ने एक अप्रैल 2015 से मार्च 2018 तक इसका आकलन किया है। यह धनराशि 8,53,23,901 रुपए है। महोबा के बीएसए पर 04 करोड़ 48 लाख 96 हजार और कानपुर देहात के बीएसए पर 07 करोड़ 70 लाख की रिकवरी निकली थी। इसके लिए दोनों के खाते ईपीएफओ ने सीज कर दिए।
इनको भी मिला है लाभ : केवल शिक्षामित्रों के ही पीएफ की रिकवरी के लिए आदेश नहीं हुआ है। अगर कानपुर नगर को देखें तो 2222 शिक्षामित्र, 25 दिव्यांगों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षक, 172 अनुदेशक और सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत आने वाले 24 सेवा प्रदाता भी शामिल हैं।
इन सभी के लिए पीएफ रिकवरी के आदेश हुए हैं। 29 अक्तूबर को बीएसए खाता सीज होने के डर से जहां कई भुगतान शुरू कर दिए गए हैं, वहीं रिकवरी से पहले बजट की उम्मीद भी लगाई जा रही है।
शिक्षा विभाग
' ईपीएफओ ने की कानपुर नगर के बीएसए के खाते से रिकवरी की तैयारी
' बकाए से लेकर अब तक 8.53 करोड़ से अधिक की रिकवरी तय