फतेहपुर : साहब! मुङो अभी पढ़ना है, मेरी शादी रुकवा दें
कल्यानपुर क्षेत्र में गंगा किनारे के पुरानी कटरी मजरे भाऊपुर में लक्ष्मी देवी श्री सदगुरु देव जूनियर हाईस्कूल में कक्षा छह की छात्र है। पिता सूरजभान निषाद ने उसका विवाह जिला उन्नाव के बीघापुर के भगानाखेड़ा मजरे दूलीखेड़ा निवासी 28 वर्षीय रोहित निषाद के साथ दस दिसंबर को तय कर दिया। यह बात छात्र को पता चली तो उसने विरोध शुरू कर दिया। किसी ने उसकी नहीं सुनी। तब उसको पुलिस से मदद लेने की बात सूझी। रविवार को घर से सभी सदस्य खेत चले गए तो मोबाइल से डायल 112 मिलाकर पूरी बात बताई। आधा घंटा के अंदर पीआरवी पहुंची और उसे सीधे थाने ले गई। छात्र ने पुलिस को बताया कि जिससे शादी तय हुई, वह युवक अक्सर घर आता है। पिता के साथ बैठकर शराब पीता है। जब पिता से कहा, मुङो अभी पढ़ने दो, शादी बाद में कर देना तो उन्होंने स्कूल जाने से रोक दिया। डांटते हुए कहा कि तुम्हारी मेरे सामने यह सब कहने की हिम्मत कैसे हुई। मां ने भी यह कहकर शांत कर दिया कि बेटी विवाह तो एक दिन होना ही है। लड़का जान-पहचान का है, शादी कर लो। थानाध्यक्ष जेपी उपाध्याय ने बताया कि किशोरी को अपना मोबाइल नंबर भी दे दिया है। बालिग होने के बाद ही शादी करने के लिए पिता राजी हो गया है और अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी है, तभी उसे छोड़ा गया है। बीट की पुलिस किशोरी का हाल-चाल लेती रहेगी।
नई दिल्ली: कानून की विसंगति व व्याख्या से कभी-कभी अजीब स्थिति पैदा हो जाती है। एक केस है, जिसमें शादी के समय दूल्हा 17 वर्ष का नाबालिग व दुल्हन 18 वर्ष से ऊपर की बालिग थी। हाई कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज हुआ दूल्हे पर जो खुद कानून की निगाह में बच्चा था। सुप्रीम कोर्ट ने दूल्हे पर दर्ज केस को रद करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने आदेश देकर गलती की है, क्योंकि शादी के समय लड़के की उम्र 17 वर्ष थी जो कि 18 वर्ष से कम है। संबंधित खबर पेज 11।
बालिग दुल्हन के नाबालिग दूल्हे को सुप्रीम कोर्ट से राहत
