प्रयागराज:इविवि के समाजशास्त्र विभाग की स्थापना को दस साल पूरे हो गए हैं, लेकिन वहां स्नातक की कक्षाएं नहीं हैं, जबकि इविवि के संघटक पांच महाविद्यालयों में समाजशास्त्र की स्नातक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। नए सत्र में भी इविवि के इस विभाग को स्नातक की कक्षाएं नहीं मिल सकेंगी। दो साल पहले छात्रों के दबाव में विभाग ने इसके लिए प्रयास किए थे, लेकिन इसके बाद न तो इविवि प्रशासन ने कोई ध्यान दिया और न ही विभाग के स्तर से विशेष प्रयास किए गए।इविवि के संघटक महाविद्यालय सीएमपी डिग्री, एसएस खन्ना गल्र्स डिग्री कॉलेज, आर्य कन्या डिग्री कॉलेज, जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज और ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज में समाजशास्त्र की स्नातक की कक्षाओं का संचालन होता है, लेकिन इविवि में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना के दस साल पूरे होने के बाद भी स्नातक का पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो सका, जबकि पीसीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में समाजशास्त्र विषय काफी महत्वपूर्ण विषय माना जाता है और प्रयागराज में प्रतियोगी छात्रों की बड़ी संख्या है। इविवि में स्थायी कुलपति की नियुक्ति न हो पाने के कारण शिक्षक भर्ती फंसी हुई है और इसी वजह से समाजशास्त्र विभाग में स्नातक का पाठ्यक्रम नए सत्र में भी शुरू नहीं किया जाए सकेगा। समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. आशीष सक्सेना का कहना है कि वर्तमान में विभाग में केवल तीन शिक्षक हैं, जिनमें एक प्रोफेसर और दो असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। विभाग में प्रोफेसर का एक और असिस्टेंट प्रोफेसर के तीन पद खाली हैं। अगर शिक्षकों के न्यूनतम चार पदों पर भी नियुक्ति हो जाती है तो विभाग में स्नातक की कक्षाएं शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा। *2010 में हुई थी विभाग की स्थापना* इविवि में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी। वर्ष 2012 से इस विभाग में पीजी का पाठ्यक्रम शुरू किया गया और प्रो. सत्यनारायण इसके पहले विभागाध्यक्ष हुए। बाद में डीन आर्ट्स और इविवि के कुलपति भी रहे। वर्ष 2017-18 में समाजशास्त्र विभाग में स्नातक का पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए बोर्ड ऑफ स्टडीज ने एक प्रस्ताव भी तैयार किया था, लेकिन विभाग में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त न होने के कारण एकेडमिक कौंसिल ने स्नातक का पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं दी।
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